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Raghav Ramkaran
meri aankhoñ ka parda ja raha hai
meri aankhoñ ka parda ja raha hai | मेरी आँखों का पर्दा जा रहा है
- Raghav Ramkaran
मेरी
आँखों
का
पर्दा
जा
रहा
है
कोई
रस्ता
निकलता
आ
रहा
है
रहूँ
आख़िर
मैं
अब
ख़ामोश
कैसे
मेरे
अंदर
कोई
चिल्ला
रहा
है
ग़मों
का
बोझ
है
या
और
ही
कुछ
तेरा
चेहरा
बदलता
जा
रहा
है
तेरी
बातें,
तेरी
बातों
का
जादू
ये
लड़का
इन
में
फँसता
जा
रहा
है
- Raghav Ramkaran
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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उतर
गया
है
चेहरा
तेरे
जाने
से
लॉक
नहीं
खुलता
है
अब
मोबाइल
का
Tanoj Dadhich
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चाहे
सोने
के
फ़्रेम
में
जड़
दो
आइना
झूट
बोलता
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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आइना
देख
कर
तसल्ली
हुई
हम
को
इस
घर
में
जानता
है
कोई
Gulzar
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एक
आईना
है
जो
इतरा
रहा
है
अब
तक
कभी
सजते
हुए
तुमने
इसे
देखा
होगा
Raj Tiwari
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रोना
हो
आसान
हमारा
इतना
कर
नुक़्सान
हमारा
बात
नहीं
करनी
तो
मत
कर
चेहरा
तो
पहचान
हमारा
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Shariq Kaifi
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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ज़रा
विसाल
के
बाद
आइना
तो
देख
ऐ
दोस्त
तिरे
जमाल
की
दोशीज़गी
निखर
आई
Firaq Gorakhpuri
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किस
लिए
देखती
हो
आईना
तुम
तो
ख़ुद
से
भी
ख़ूब-सूरत
हो
Jaun Elia
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घूमता
रहता
है
हर
वक़्त
मेरी
आँखों
में
एक
चेहरा
जो
कई
साल
से
देखा
भी
नहीं
Riyaz Tariq
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गुमसुम
माली
देख
रहा
हूँ
आँख
सवाली
देख
रहा
हूँ
बाबू
जी
के
हाथ
भी
देखे
और
कुदाली
देख
रहा
हूँ
पंछी
से
था
प्यार
मुझे
तो
पिंजरा
ख़ाली
देख
रहा
हूँ
डूब
रहा
है
मेरा
सूरज
और
मैं
लाली
देख
रहा
हूँ
तुम
भी
देखो
दुनिया
में
कुछ
मैं
हरियाली
देख
रहा
हूँ
बस्ती
का
अहवाल
न
पूँछो
मन्ज़र
ख़ाली
देख
रहा
हूँ
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Raghav Ramkaran
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बर्बादी
की
राह
बताने
वाले
हैं
ये
जो
सारे
लोग
ज़माने
वाले
हैं
हम
पर
क्या
इल्ज़ाम
लगाओगे
लोगों
हम
तो
गंगा
रोज़
नहाने
वाले
हैं
दिल
के
तार
बजाना
हम
सेे
सीखोगी?
हम
चेले
उस्ताद
घराने
वाले
हैं
सुनने
वालों
क़लम
उठाओ
लिख
डालो
अब
हम
अपना
हाल
सुनाने
वाले
हैं
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Raghav Ramkaran
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बेचैनियों
का
अपनी
सबब
जान
लीजिए
डर
क्यूँ
रही
हो?
दिल
का
कहा
मान
लीजिए
Raghav Ramkaran
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इक
शख़्स
की
हर
एक
निशानी
समेटकर
हम
सो
गए
थे
आँख
में
पानी
समेटकर
Raghav Ramkaran
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लफ्ज़
तुम्हारे
लब
तक
आना
भूल
गए
क्या
तुम
मेरी
ग़ज़लें
गाना
भूल
गए
अब
तो
पंछी
जंगल-जंगल
दिखते
हैं
लगता
है
वो
गाँव
का
दाना
भूल
गए
शहर
में
जब
से
पढ़ने
आया
हूँ
तब
से
बाबू
जी!
मुझ
पर
झुँझलाना
भूल
गए
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Raghav Ramkaran
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