tamaam shahar tha jungle sa eent patthar ka | तमाम शहर था जंगल सा ईंट पत्थर का

  - Rafiq Raaz
तमामशहरथाजंगलसाईंटपत्थरका
ग़ज़बवोदेखकेआयाहूँबाद-ए-सरसरका
सदाएँचश्मेंउबलनेकीरहीहैंमुझे
किसीनेतोड़दियाक्यासुकूतपत्थरका
मिलाहैख़ाक-नशीनीसेयेमक़ाममुझे
ज़मींहैतख़्तफ़लकताजहैमिरेसरका
मुझेतोकोईभीमौसमउड़ानहींसकता
किमैंतोरंगहूँउसकेअधूरेमंज़रका
रवाँकियाहैमुझेकिनबुलंदियोंकीतरफ़
किआसमानभीलगताहैसायाशह-परका
मैंअपनाघरतोजलाकेसफ़रपेनिकलाथा
ख़यालदश्तमेंआयाफ़क़ततिरेदरका
सुनाईदेतीनहींहैअबअपनीआहटभी
रवाँहुआहैहरइकसम्तशोरअंदरका
जबआफ़्ताबसामुझपरहुआथारौशनतू
मुझेहैयादवोयख़-बस्तादिनदिसम्बरका
हवा-ए-लम्समेंइकआगभीथीपोशीदा
किताबनाकहुआजिस्मसंग-ए-मरमरका
ज़हे-नसीबमोहम्मदकानाम-लेवाहूँ
हैलाखशुक्रख़ुदा-ए-बुज़ुर्ग-ओ-बरतरका
  - Rafiq Raaz
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