aaj bhi koi kahii gosh-bar-awaaz na tha | आज भी कोई कहीं गोश-बर-आवाज़ न था

  - Rafia Shabnam Abidi
आजभीकोईकहींगोश-बर-आवाज़था
आजभीचारोंतरफ़लोगथेअंधेबहरे
आजभीमेरीहरइकसोचपेबैठेपहरे
आजभीतुममिरीहरसाँसकेमालिकठहरे
मेरागुम-नामसाखोयासायेबेचैनवजूद
एकपहचानकासदियोंसेजोदीवानारहा
आजभीअपनेसेबेगानारहा
औरजियाभीतोजियाबनकेकिसीकासाया
आजभीमुझसेमिरामैंनहींमिलनेपाया
आजभीमैंनेख़ुदअपनेसेमुलाक़ातकी
एकपलहीकोसही
अपनेहीदिलसेमगरदिलकीकोईबातकी
बीतीसदियोंकीतरह
आजभीआजकादिनबीतगया
  - Rafia Shabnam Abidi
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