ज़ातकेकर्बकोलफ़्ज़ोंमेंदबाएरक्खा
मेज़परतेरीकिताबोंकोसजाएरक्खा
तूनेइकशामजोआनेकाकियाथावा'दा
मैंनेदिन-रातचराग़ोंकोजलाएरक्खा
किससलीक़ेसेख़यालोंकोज़बाँदेदेकर
मुझकोउसशख़्सनेबातोंमेंलगाएरखा
मैंवोसीताकिजोलछमनकेहिसारोंमेंरही
हमवोजोगीकिअलखफिरभीजगाएरक्खा
शायदआजाएकिसीरोज़वोसज्दाकरने
इसीउम्मीदपेआँचलकोबिछाएरक्खा
चूड़ियाँरखनसकींमेरीनमाज़ोंकाभरम
फिरभीहाथोंकोदु'आओंमेंउठाएरक्खा
जानेक्यूँँआगईफिरयादउसीमौसमकी
जिसने'शबनम'कोहवाओंसेबचाएरक्खा