badalti rut pe hawaon ke sakht pahre the | बदलती रुत पे हवाओं के सख़्त पहरे थे

  - Rafia Shabnam Abidi
बदलतीरुतपेहवाओंकेसख़्तपहरेथे
लहूलहूथीनज़रदाग़दाग़चेहरेथे
येराज़खुलसकाहर्फ़-ए-नारसापेमिरे
सदाएँतेज़बहुतथींकिलोगबहरेथे
वोपूजनेकीसियासतसेख़ूबवाक़िफ़था
वहीचढ़ाएजोगेंदेकेज़र्दसेहरेथे
जोभाईलौटकेआएकभीदरियासे
उन्हींकेबाज़ूक़वीथेबदनइकहरेथे
उसीसबबसेमिराअक्सटूटटूटगया
उसआइनेमेंकईऔरभीतोचेहरेथे
समुंदरोंकावोप्यासाथाऔरओसथीमैं
वोअब्रलौटगयाजिसकेलबसुनहरेथे
इनआँचलोंपेकोईसज्दा-रेज़होसका
किजिनकेरंगबहुतशोख़औरगहरेथे
समाअ'तोंकेधुँदलकोंमेंखोगए'शबनम'
वोसारेलफ़्ज़जोपलकोंपेकेठहरेथे
  - Rafia Shabnam Abidi
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