hujoom-e-gardish-e-dauraan hai kya ghazal kahiye | हुजूम-ए-गर्दिश-ए-दौराँ है क्या ग़ज़ल कहिए

  - Raaz Allahabadi
हुजूम-ए-गर्दिश-ए-दौराँहैक्याग़ज़लकहिए
दिल-ओ-दिमाग़परेशाँहैक्याग़ज़लकहिए
येकिसनेआगलगादीगुलोंकेदामनमें
धुआँधुआँसागुलिस्ताँहैक्याग़ज़लकहिए
जलाएजातेहैंअबघरमेंआँसुओंकेचराग़
अजीबजश्न-ए-चराग़ाँहैक्याग़ज़लकहिए
येसीटियोंकीसदारातकायेसन्नाटा
सुकूत-ए-शहर-ए-ख़मोशाँहैक्याग़ज़लकहिए
घिराहुआहैचमननरग़ा-ए-सियासतमें
बहारशो'ला-ब-दामाँहैक्याग़ज़लकहिए
जो'राज़'मुल्कमेंअम्न-ओ-अमाँकीबातकरे
अबउसकेवास्तेज़िंदाँहैक्याग़ज़लकहिए
  - Raaz Allahabadi
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