aashiyaan jal gaya gulsitaan loot gaya ham qafas se nikal kar kidhar jaayenge | आशियाँ जल गया, गुल्सिताँ लुट गया, हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे

  - Raaz Allahabadi
आशियाँजलगया,गुल्सिताँलुटगया,हमक़फ़ससेनिकलकरकिधरजाएँगे
इतनेमानूससय्यादसेहोगए,अबरिहाईमिलेगीतोमरजाएँगे
औरकुछदिनयेदस्तूर-ए-मय-ख़ानाहै,तिश्ना-कामीकेयेदिनगुज़रजाएँगे
मेरेसाक़ीकोनज़रेंउठानेतोदो,जितनेख़ालीहैंसबजामभरजाएँगे
नसीम-ए-सहरतुझकोउनकीक़सम,उनसेजाकरकहनामिराहाल-ए-ग़म
अपनेमिटनेकाग़मतोनहींहैमगर,डरयेहैउनकेगेसूबिखरजाएँगे
अश्क-ए-ग़मलेकेआख़िरकिधरजाएँहम,आँसुओंकीयहाँकोईक़ीमतनहीं
आपहीअपनादामनबढ़ादीजिए,वर्नामोतीज़मींपरबिखरजाएँगे
कालेकालेवोगेसूशिकन-दर-शिकन,वोतबस्सुमकाआलमचमन-दर-चमन
खींचलीउनकीतस्वीरदिलनेमिरे,अबवोदामनबचाकरकिधरजाएँगे
  - Raaz Allahabadi
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