shab-khoon ka khatra hai abhii jaagte rahna | शब-ख़ून का ख़तरा है अभी जागते रहना

  - Raaz Allahabadi
शब-ख़ूनकाख़तराहैअभीजागतेरहना
क़ातिलपस-ए-पर्दाहैअभीजागतेरहना
हैंक़ैदतिरेबख़्तकेसूरजकीशुआएँ
येसुब्हकाधोकाहैअभीजागतेरहना
लड़नाहैतुझेशबकेअँधेरोंसेमुसाफ़िर
सूरजकहाँनिकलाहैअभीजागतेरहना
फिरआनेलगीनींदमिरेहम-सफ़रोंको
अपनातोइरादाहैअभीजागतेरहना
हैमंज़िल-ए-तामीरमेंता'बीरकासूरज
येख़्वाबअधूराहैअभीजागतेरहना
नींदेंतोयेकहतीहैंचलोचैनसेसोएँ
दिलसीनेमेंकहताहैअभीजागतेरहना
येकहकेमुझे'राज़'वोसोनेनहींदेता
हरगामपेख़तराहैअभीजागतेरहना
  - Raaz Allahabadi
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