rishte-naate kho ga.e sab gaav ka ghar kho gaya | रिश्ते-नाते खो गए सब गाँव का घर खो गया

  - Qamar Siddiqi
रिश्ते-नातेखोगएसबगाँवकाघरखोगया
रेलकीसीटीबजीऔरसारामंज़रखोगया
चलतेफिरतेलोगसड़केंज़िंदगीआवारगी
हरनज़ाराएकदिनदिलसेनिकलकरखोगया
रातमैंनेख़्वाबदेखाख़्वाबकीता'बीरभी
इकपरिंदाछतपेबैठाऔरउड़करखोगया
कुछनहींअबआइनेमेंसाफ़धुँदलाकुछनहीं
अक्सकीआँखोंमेंजोहोताथातेवरखोगया
उनसभीहैरानबच्चोंकीतरहहैंहम'क़मर'
वक़्तकेइसमेलेमेंजिनकामुक़द्दरखोगया
खोगएइसबारमेरेख़्वाबसारेधुंदमें
औरअबकेरेतमेंयेमेराबिस्तरखोगया
  - Qamar Siddiqi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy