jo zindagi ke har ek dhaare men jaagta hai | जो ज़िंदगी के हर एक धारे में जागता है

  - Qamar Raza Shahzad
जोज़िंदगीकेहरएकधारेमेंजागताहै
तिराबदनइसचराग़-पारेमेंजागताहै
गुरेज़कैसेकरेगामेरेवजूदसेतू
कितेरासूरजमिरेसितारेमेंजागताहै
मुझेख़बरहैख़मोशसोयाहुआयेदरिया
कहींकिसीदूसरेकिनारेमेंजागताहै
बहुतकठिनतोनहींहैसचकोतलाशकरना
कियेलहूकेहरइस्तिआ'रेमेंजागताहै
वोशख़्सयूँँहीनहींमिरेसाथचलनेवाला
कहींकोईफ़ाएदाख़सारेमेंजागताहै
  - Qamar Raza Shahzad
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