kisi ke aks ko hairaan karna chahta hooñ | किसी के अक्स को हैरान करना चाहता हूँ

  - Qamar Raza Shahzad
किसीकेअक्सकोहैरानकरनाचाहताहूँ
मैंसंग-ओ-आइनायक-जानकरनाचाहताहूँ
बुलंदकरताहूँदस्त-ए-दुआ'किजैसेमैं
किसीकीज़ातपरएहसानकरनाचाहताहूँ
बहुतहक़ीरहैलेकिनतुझेअताकरके
मैंदिलकोतख़्त-ए-सुलैमानकरनाचाहताहूँ
मुझेयेज़िंदगीदुश्वारभीक़ुबूलमगर
कहींकहींइसेआसानकरनाचाहताहूँ
मैंऐसीकौनसीशयखोचुकाहूँजिसकेएवज़
सभीकोबे-सर-ओ-सामानकरनाचाहताहूँ
  - Qamar Raza Shahzad
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