agar majboor haft-aflaak hota | अगर मजबूर हफ़्त-अफ़्लाक होता

  - Qamar Raza Shahzad
अगरमजबूरहफ़्त-अफ़्लाकहोता
हमारीतरहतूभीख़ाकहोता
ज़मींतारीकरहतीऔरसूरज
हमारेजिस्मकीपोशाकहोता
कहींइसदास्ताँऔरख़्वाबकेबीच
तिरामल्बूसगुलभीचाकहोता
हमअपनाफ़ाएदाभीसोचलेते
अगरनुक़सानकाइदराकहोता
ज़रामौसमबदलताऔरफिरतो
हमारेहिज्रमेंनमनाकहोता
  - Qamar Raza Shahzad
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