tire aasmaañ se azaab kyun nahin tootaa | तिरे आसमाँ से अज़ाब क्यूँँ नहीं टूटता

  - Qamar Raza Shahzad
तिरेआसमाँसेअज़ाबक्यूँँनहींटूटता
मिरीनींदऔरमिराख़्वाबक्यूँँनहींटूटता
तिराज़िक्रकरताहूँसुब्ह-ओ-शामनमाज़में
येतिलिस्म-ए-अज्र-ओ-सवाबक्यूँँनहींटूटता
मिरेख़द्द-ओ-ख़ालबिखरतेक्यूँँनहींराहमें
तिरेआईनेकासराबक्यूँँनहींटूटता
तिरेलफ़्ज़लफ़्ज़कीमुंतज़िरहैंसमाअ'तें
लब-ए-हुस्नतेराहिजाबक्यूँँनहींटूटता
कड़ेमौसमोंकाहदफ़हूँमैंतो'क़मर-रज़ा'
मिरीशाख़परसेगुलाबक्यूँँनहींटूटता
  - Qamar Raza Shahzad
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