vo aaghaaz-e-mohabbat ka zamaana | वो आग़ाज़-ए-मोहब्बत का ज़माना

  - Qamar Jalalvi
वोआग़ाज़-ए-मोहब्बतकाज़माना
ज़रासीबातबनतीथीफ़साना
क़फ़सकोक्यूँँसमझलूँआशियाना
अभीतोकरवटेंलेगाज़माना
येकहकरसब्रकरतेहैंसितमपर
हमाराभीकभीहोगाज़माना
क़फ़ससेभीनिकालाजारहाहूँ
कहाँलेजाएदेखोआब-ओ-दाना
ग़ुरूरइतनाकरतीर-ए-सितमपर
किअक्सरचूकजाताहैनिशाना
अगरबिजलीकाडरहोगातोउनको
बुलंदीपरहैजिनकाआशियाना
कहानीदर्द-ए-दिलकीसुनकेपूछा
'क़मर'सचकहयेकिसकाहैफ़साना
  - Qamar Jalalvi
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