sab pighal jaa.e tamasha vo idhar kab hogaa | सब पिघल जाए तमाशा वो इधर कब होगा

  - Qamar Iqbal
सबपिघलजाएतमाशावोइधरकबहोगा
मोमकेशहरससूरजकागुज़रकबहोगा
ख़्वाबकाग़ज़केसफ़ीनेहैंबचाएँकैसे
ख़त्मइसआगकेदरियाकासफ़रकबहोगा
जिसकानक़्शाहैमिरेज़ेहनमेंइकमुद्दतसे
घरवोतामीरसेपहलेहीखंडरकबहोगा
मेरेखोएहुएमहवरपेजोपहुँचाएमुझे
अबलहूमेंमिरेपैदावोभँवरकबहोगा
सब्ज़रक्खाहैजिसेमैंनेलहूदेके'क़मर'
मेहरबाँधूपमेंआख़िरवोशजरकबहोगा
  - Qamar Iqbal
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