yuñ qaid ham hue ki hawa ko taras ga.e | यूँँ क़ैद हम हुए कि हवा को तरस गए

  - Qamar Iqbal
यूँँक़ैदहमहुएकिहवाकोतरसगए
अपनेहीकानअपनीसदाकोतरसगए
थेक्याअजीबलोगकिजीनेकेशौक़में
आब-ए-हयातपीकेहवाकोतरसगए
कुछरोज़केलिएजोकियाहमनेतर्कशहर
बाशिंदगान-ए-शहरजफ़ाकोतरसगए
मुर्दाअदबकोदीहैनईज़िंदगीमगर
बीमारख़ुदपड़ेतोदवाकोतरसगए
ख़ालीजोअपनाजिस्मलहूसेहुआ'क़मर'
कितनेहीहाथरंग-ए-हिनाकोतरसगए
  - Qamar Iqbal
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