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Chandan Sharma
kabhi dekha nahin jisne badan ke aage kuchh bhi
kabhi dekha nahin jisne badan ke aage kuchh bhi | कभी देखा नहीं जिसने बदन के आगे कुछ भी
- Chandan Sharma
कभी
देखा
नहीं
जिसने
बदन
के
आगे
कुछ
भी
भला
वो
क्यूँ
मुहब्बत
जावेदाना
ढूँढता
है
- Chandan Sharma
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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कभी
कभार
उसे
देख
लें
कहीं
मिल
लें
ये
कब
कहा
था
कि
वो
ख़ुश-बदन
हमारा
हो
Parveen Shakir
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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गूँजता
है
बदन
में
सन्नाटा
कोई
ख़ाली
मकान
हो
जैसे
Aanis Moin
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आईने
आँख
में
चुभते
थे
बिस्तर
से
बदन
कतराता
था
एक
याद
बसर
करती
थी
मुझे
मैं
साँस
नहीं
ले
पाता
था
Tehzeeb Hafi
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ख़याल
कब
से
छुपा
के
ये
मन
में
रक्खा
है
मिरा
क़रार
तुम्हारे
बदन
में
रक्खा
है
Siraj Faisal Khan
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सच
तो
ये
है
'मजाज़'
की
दुनिया
हुस्न
और
इश्क़
के
सिवा
क्या
है
Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़
को
पूछता
नहीं
कोई
हुस्न
का
एहतिराम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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टूटा
तो
हूँ
मगर
अभी
बिखरा
नहीं
'फ़राज़'
मेरे
बदन
पे
जैसे
शिकस्तों
का
जाल
हो
Ahmad Faraz
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बदन
का
ज़िक्र
बातिल
है
तो
आओ
बिना
सर
पैर
की
बातें
करेंगे
Fahmi Badayuni
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इस
तरह
ख़ुद-कुशी
की
है
मैंने
रात
दिन
शा'इरी
की
है
मैंने
इश्क़
तो
कर
नहीं
सका
कभी
भी
इश्क़
की
बंदगी
की
है
मैंने
हिज्र
में
कुछ
नहीं
किया
लेकिन
बातें
तेरी
कही
की
है
मैंने
हो
के
नाकाम
इश्क़
में
तेरे
खूब
आवारगी
की
है
मैंने
ठीक
है
मैं
क़बूल
करता
हूँ
हिज्र
में
दिल-लगी
की
है
मैंने
मैं
जिए
जा
रहा
हूँ
जाने
किसे
ये
किसे
ज़िंदगी
की
है
मैंने
बाँट
के
ख़ुद
को
दो
किनारों
में
ख़ुद
को
ही
इक
नदी
की
है
मैंने
जब
से
जाना
है
रौशनी
का
सच
कमरे
में
तीरगी
की
है
मैंने
दिल
को
बहलाने
के
लिए
अपने
कुछ
कभी
कुछ
कभी
की
है
मैंने
इश्क़
हो
तुम
सो
इश्क़
है
तुम
से
दोस्तों
से
दोस्ती
की
है
मैंने
नज़्म-ओ-ग़ज़लों
के
नाम
पर
"जाज़िब"
ज़िक्र
बस
आपकी
की
है
मैंने
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Chandan Sharma
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कहीं
किसी
भी
बहाने
मुझे
बुला
इक
रोज़
ऐ
चाँद
तुझ
को
क़सम
है
ज़मीं
पे
आ
इक
रोज़
मुझे
क़बूल
है
गर
खाक़
भी
हो
जाऊँ
मैं
क़रीब
आ
के
मुझे
सीने
से
लगा
इक
रोज़
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Chandan Sharma
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कर
इरादे
बयाँ
जान
दिल
खोल
कर
क्यूँ
गई
दूर
तू
अलविदा
बोल
कर
और
जुदाई
में
तुम
मुझ
से
झगड़ी
नहीं
मुझ
से
नफ़रत
भी
तुम
ने
किया
तोल
कर
मुझ
को
अब
हक़
नहीं
मैं
तुझे
कुछ
कहूँ
आदतन
बातें
होंगी
ज़रा
गोल
कर
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Chandan Sharma
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एक
लड़की
जुगनुओं
से
माँगती
है
रौशनी
क्यूँ
एक
लड़की
जिस
ने
रौशन
कर
रखा
है
इस
जहाँ
को
Chandan Sharma
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वहाँ
भी
मैंने
मुहब्बत
की
बातें
छेड़ी
है
जहाँ
लगे
थे
सभी
बस
बदन
को
पाने
में
Chandan Sharma
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