jo pad gaii thii girah dil men khholte ham bhi | जो पड़ गई थी गिरह दिल में खोलते हम भी

  - Qamar Iqbal
जोपड़गईथीगिरहदिलमेंखोलतेहमभी
वोबातकरतातोकुछउससेबोलतेहमभी
हवाकोकिसनेछुआहैजोतुझकोछूपाते
ख़लामेंफिरतेहैंरस्ताटटोलतेहमभी
कहाँपेठहरेंकिमानिंद-ए-बर्ग-ए-आवारा
हवाकेदोशपेफिरतेहैंडोलतेहमभी
अँधेराशहरकीगलियोंकाघरमेंदरआता
ज़राजोरातकोदरवाज़ाखोलतेहमभी
'क़मर'येलुत्फ़जीनेकाफिरहमेंआता
लहूमैंज़हरअगरख़ुदघोलतेहमभी
  - Qamar Iqbal
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