mauqa-e-yaas kabhi teri nazar ne na diya | मौक़ा-ए-यास कभी तेरी नज़र ने न दिया

  - Parvez Shahidi
मौक़ा-ए-यासकभीतेरीनज़रनेदिया
शर्तजीनेकीलगादीमुझेमरनेदिया
कमसेकममैंग़म-ए-दुनियाकोभुलासकताथा
परतिरीयादनेयेकामभीकरनेदिया
तेरीग़म-ख़्वारनिगाहोंकेतसद्दुक़किमुझे
ग़म-ए-हस्तीकीबुलंदीसेउतरनेदिया
वोतिरीसुर्ख़ी-ए-आरिज़किक़रीबसकी
रंगजिसफ़िक्रकोभीख़ून-ए-जिगरनेदिया
हुस्न-ए-हम-दर्दतिराहम-सफ़र-ए-शौक़रहा
मुझकोतन्हाकिसीमंज़िलसेगुज़रनेदिया
कितनीख़ुश-ज़ौक़हैतेरीनिगह-ए-बादा-फ़रोश
ख़ालीरहनेदियाजामकोभरनेदिया
  - Parvez Shahidi
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