hua hai na hogaa zam | हुआ है न होगा ज़माना किसी का

  - Parvez akhtar
हुआहैहोगाज़मानाकिसीका
उठानाकिसीकोगिरानाकिसीका
कईरहनुमाथेअलावाभीदिलके
मगरहमनेकहनामानाकिसीका
त'अल्लुक़कहाँज़िंदगीसेहमारा
तआ'रुफ़हैबसग़ाएबानाकिसीका
मुक़द्दरहीअव्वलमुक़द्दरहीआख़िर
पानीकिसीकादानाकिसीका
जोबाक़ीबचेंगेवोकैसेजिएँगे
अगरहोहीजाएज़मानाकिसीका
बिनावज्ह-ए-अज़्मतनज़रमेंसभीकी
जोकिरदारथामुजरिमानाकिसीका
ज़मानेकोबर्दाश्तहोतानहींहै
नयाकोईपौदालगानाकिसीका
बहुतदर्ददेताहै'परवेज़''अख़्तर'
मुसलसलहमेंआज़मानाकिसीका
वहाँपरहैं'परवेज़'अबहमजहाँपर
आनाकिसीकाजानाकिसीका
  - Parvez akhtar
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