yahaañ kise hansne ki furqat rakkhi hai | यहाँ किसे हँसने की फ़ुर्सत रक्खी है

  - Parvez akhtar
यहाँकिसेहँसनेकीफ़ुर्सतरक्खीहै
एकसेनिमटोदूसरीआफ़तरक्खीहै
हरजानिबइकखेलहैआपा-धापीका
मंज़रमंज़रकैसीवहशतरक्खीहै
सोचूँतोबाज़ारभीछोटालगताहै
घरकेअंदरइतनीज़रूरतरक्खीहै
तेरेदिलकोप्यारसेमाला-मालकरे
फूलकेअंदरजिसनेनिकहतरक्खीहै
एककेदुखमेंसारेरोयाकरतेहैं
घरमेंअभीअज्दादकीदौलतरक्खीहै
  - Parvez akhtar
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