mausamon ki sakhtiyan | मौसमों की सख़्तियाँ

  - Parvez akhtar
मौसमोंकीसख़्तियाँ
अल-हफ़ीज़-ओ-अल-अमाँ
बे-वफ़ाहैयेजहाँ
आगेतुमजानोमियाँ
शहरमेंदो-चारथे
क्याहुएआशुफ़्तगाँ
अबकोईमुसबतअमल
कबतलकआह-ओ-फ़ुग़ाँ
एकसहरा-ए-बसीत
तेरेमेरेदरमियाँ
रहमसेआरीज़मीं
औरनाराज़आसमाँ
क्यूँउठाएँज़िल्लतें
किसकोरहनाहैयहाँ
उड़रहीहैंचारसू
ज़िंदगीकीधज्जियाँ
मा'रकाहैशेर-गोई
सहलमतजानोमियाँ
फिरवहीकाग़ज़क़लम
फिरवहीकार-ए-ज़ियाँ
  - Parvez akhtar
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