nikaali jaa.e kis tarkeeb se taqreer ki soorat | निकाली जाए किस तरकीब से तक़रीर की सूरत

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
निकालीजाएकिसतरकीबसेतक़रीरकीसूरत
वोआईनेकीसूरतऔरमैंतस्वीरकीसूरत
गिरफ़्तार-ए-मोहब्बतकरलियाबातोंहीबातोंमें
तसलसुलसेनुमायाँहोगईज़ंजीरकीसूरत
ज़ियादाआईनेसेहैमुनव्वरमुसहफ़-ए-आरिज़
औरइसपरख़ाल-ए-मुश्कींआया-ए-ततहीरकीसूरत
तिरेतेवरबदलतेहीज़मानाहोगयादुश्मन
हिलाल-ए-ईदभीज़ाहिरहुआशमशीरकीसूरत
सितमहोजाएगागरबालभीबेकाहुआउसका
निकलकरआहसीनेसेगईहैतीरकीसूरत
कभीमीठीनिगाहेंहैंकभीतेवरबदलतेहैं
मरताहूँजीताहूँयेहैताज़ीरकीसूरत
मज़ाक्याउसबुत-ए-बे-पीरसेदिलकेलगानेका
जोख़ल्वतमेंहोबुतमहफ़िलमेंहोतस्वीरकीसूरत
ख़फ़ाहोतेहीकुछकाकुछभवोंकाहोगयानक़्शा
कभीख़ंजरकीसूरतऔरकभीशमशीरकीसूरत
जिसेमिलजाएख़ाक-ए-पाक-ए-दश्त-ए-कर्बला'परवीं'
पलटकरभीदेखेवोकभीइक्सीरकीसूरत
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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