yuñ guzre chaman se ki gulistaan nahin dekha | यूँँ गुज़रे चमन से कि गुलिस्ताँ नहीं देखा

  - Panna Lal Noor
यूँँगुज़रेचमनसेकिगुलिस्ताँनहींदेखा
काँटोंपेचलेऔरबयाबाँनहींदेखा
उसशम्अ'पेजलनेकोतड़पतेहैंपतंगे
जिसशम्अ'कोआँखोंसेफ़रोज़ाँनहींदेखा
रक़्साँहैयहाँनूर-ब-कफ़जल्वा-ए-जानाँ
क्यातूनेअभीदीदा-ए-हैराँनहींदेखा
होनेकोतोथा'नूर'केदिलमेंभीबड़ादर्द
लेकिनकभीचेहरेसेनुमायाँनहींदेखा
  - Panna Lal Noor
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