mere gham ka asar zaraa na hua | मेरे ग़म का असर ज़रा न हुआ

  - Panna Lal Noor
मेरेग़मकाअसरज़राहुआ
येतोपत्थरहुआख़ुदाहुआ
देखलोआजकेबिस्मिलको
कौनजानेयेकलहुआहुआ
तर्क-ए-उल्फ़तकाएकहीग़महै
येइरादाभीदेर-पाहुआ
तिरछीचितवनउतरगईदिलमें
तीरकजथामगरख़ताहुआ
जज़्बा-ए-शौक़होगयादुश्मन
मुझसेइज़हार-ए-मुद्दआहुआ
वक़्फ़-ए-गर्दिशहूँसूरत-ए-परकार
दूरमरकज़काफ़ासलाहुआ
लौह-ए-हस्तीसेक्यूँमिटातेहो
मैंकभीहर्फ़-ए-मुद्दआ'हुआ
  - Panna Lal Noor
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