tapish ho soz-e-gham ho ishq men lekin fugaan kyuuñ ho | तपिश हो सोज़-ए-ग़म हो इश्क़ में लेकिन फ़ुग़ाँ क्यूँ हो

  - Panna Lal Noor
तपिशहोसोज़-ए-ग़महोइश्क़मेंलेकिनफ़ुग़ाँक्यूँहो
लगीहोआगसीनेमेंमगरउसमेंधुआँक्यूँहो
लुटादीअपनेहाथोंजबमताअ'-ए-सीम-ओ-ज़रमैंने
तोफिरअबसंग-रेज़ोंपरग़म-ए-सूद-ओ-ज़ियाँक्यूँहो
निगाह-ए-अव्वलींतोइंतिहाईकैफ़-परवरथी
वहीदिलमेंउतरकरउम्रभरकोनीश-ए-जाँक्यूँहो
अता-ए-ग़ममेंभीतफ़रीक़कीतालिबहैख़ुद्दारी
जोसबकीदास्तान-ए-ग़महोमेरीदास्ताँक्यूँहो
जीतेजीशिफ़ाबख़्शीजीनेकीदु'आमाँगी
कोईफिर'नूर'मय्यतपरहमारीनौहा-ख़्वाँक्यूँहो
  - Panna Lal Noor
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