dil-sokhta ko apne jalaya ghazab kiya | दिल-सोख़्ता को अपने जलाया ग़ज़ब किया

  - Pandit Jawahar Nath Saqi
दिल-सोख़्ताकोअपनेजलायाग़ज़बकिया
नैरंगतुमनेक्यायेदिखायाग़ज़बकिया
ज़िंदाकियाहैहसरत-ए-मुर्दाकोबे-वफ़ा
तूबा'द-ए-मर्गगोरपेआयाग़ज़बकिया
येदर्द-ए-दर्द-मंदतमाशादिखाएगा
आफ़त-रसीदाकोजोसतायाग़ज़बकिया
हमख़ानुमाँ-ख़राबभटकतेकहाँफिरें
बैठेबिठाएउसनेउठायाग़ज़बकिया
सबकहरहेथेबुलबुल-ए-कश्मीरकेहरीफ़
उसगुलनेअपनायारबनायाग़ज़बकिया
मजज़ूब-ओ-मस्तपीर-ए-मुग़ाँक्यूँँवोरहे
'साक़ी'कोजाम-ए-जज़्बपिलायाग़ज़बकिया
  - Pandit Jawahar Nath Saqi
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