हरीसहोनजहाँमेंनअपनाजीभटका
ज़बाँबिगड़गईगरउसकोआगयाचटका
जोशाहराहगयाकुछनहींहुआखटका
भटकरहाहैमुसाफ़िरहुआजोओघटका
क़बापहनतेजोबरहमहुआवोचुस्त-क़बा
दियाहैचीन-ए-जबींनेभीसाथसिलवटका
यहाँभीइश्वा-ए-रा'नाखड़ीलगाताहै
वोबहर-ए-हुस्नहुआआश्नाजोकरवटका
हमारीवज़्असेआशुफ़्ताहोगयामजनूँ
हमेंजोनज्दकेबनमेंजिन्होंनेदेपटका
नज़रहुईहैपरेशाँहिजाबमेंहैवोरुख़
तिलिस्मखुलनहींसकताहैउनकेघुँघटका
कियाहैज़ुल्फ़-ओ-रुख़-ओ-चश्मनेजोसर-गश्ता
निकलकेघरसेमिरादिलतिराहेमेंभटका
किसेहैताबजोदेखेनिगाह-ए-क़हर-आलूद
कोईउधरकोचलाऔरकोईइधरसटका
हमारेअश्क-ए-मुसलसलज़रानहींरुकते
येघाटख़ूबरवाँहोरहाहैपनघटका
हमारारंग-ए-तबीईहैसुल्ह-ए-कुलमशरब
पसंदहमकोनहींक़ाफ़ियाभीझंझटका
कहेंगे'साक़ी'-ए-सरमस्तशेर-ए-तरक्याहम
हमारेहिस्सेमेंआयाहैजामतलछटका