kis rang men bayaan karen maajra-e-qalb | किस रंग में बयान करें माजरा-ए-क़ल्ब

  - Pandit Jawahar Nath Saqi
किसरंगमेंबयानकरेंमाजरा-ए-क़ल्ब
देखाजोहमनेजल्वा-ए-हैरत-फ़ज़ा-ए-क़ल्ब
वोजानताहैवुसअत-ए-मशरबकेराज़को
देखाहैजिसनेआलम-ए-बे-इंतिहा-ए-क़ल्ब
यारबयेक़ल्ब-ए-हैअत-ए-कलबीअजीबहै
नैरंगदेखतेहैंयेक्याख़ुदा-ए-क़ल्ब
येज़मज़मातुयूर-ए-ख़ुश-आहंगकानहीं
हैनग़्मा-संजबुलबुल-ए-रंगीं-नवा-ए-क़ल्ब
रौशन-ज़मीरहैंयेतिरेख़ाकसार-ए-इश्क़
रखतेहैंफ़ैज़-ए-इश्क़सेनूर-ओ-सफ़ा-ए-क़ल्ब
सालिकबक़ा-ए-इश्क़उसेकबनसीबहो
जिसकेसुलूकमेंहुईहोफ़ना-ए-क़ल्ब
ताबाँहैदिलमेंमहर-ए-दरख़्शान-ए-मअ'रिफ़त
नूर-उल-क़ुलूबहैयेहमारीज़िया-ए-क़ल्ब
उश्शाक़जोतसव्वुर-ए-बर्ज़ख़केहोगए
आतीहैदम-ब-दमयेउन्हींकोसदा-ए-क़ल्ब
क़ल्ब-ए-शहीदमेंहैतजल्ली-ए-हुस्न-ए-यार
मुश्ताक़-ए-जल्वाक्यूँँहोंदिलसेफ़िदा-ए-क़ल्ब
साहब-दिलोंकोहक़नेदियाहैहुज़ूर-ए-क़ल्ब
मक़्बूलकिसतरहसेनहींहोदुआ-ए-क़ल्ब
येशौक़-ओ-रमकीभूल-भुलय्याँअजीबहै
नैरंग-ए-रंगहैहरम-ए-दिल-कुशा-ए-क़ल्ब
जिसपरपड़ीजहाँमेंअबुल-वक़्तकीनिगाह
उसकोमिलाहैआइनागीती-नुमा-ए-क़ल्ब
हैंआफ़्ताबनार-ए-मोहब्बतकेसोख़्ता
सोहबतमेंउनकीहोतीहै'साक़ी'जिला-ए-क़ल्ब
  - Pandit Jawahar Nath Saqi
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