shab-e-wasl ham mukhtasar dekhte hain | शब-ए-वस्ल हम मुख़्तसर देखते हैं

  - Paikar Jafari
शब-ए-वस्लहममुख़्तसरदेखतेहैं
इधरआँखझपकीसहरदेखतेहैं
मरीज़-ए-मोहब्बतकीहोख़ैरया-रब
येरहरहकेक्यूँचारा-गरदेखतेहैं
पए-पुर्सिश-ए-ग़मकोईरहाहै
हमआहोंकाअपनीअसरदेखतेहैं
हमेंयादआताहैसह्न-ए-गुलिस्ताँ
जोज़िंदाँकेदीवार-ओ-दरदेखतेहैं
हरइकशयमेंहैतेरेजलवोंकापरतव
तुझेसाफ़अहल-ए-नज़रदेखतेहैं
तसव्वुरजोहैज़ुल्फ़-ओ-आरिज़काउनकी
ब-यक-वक़्तशाम-ओ-सहरदेखतेहैं
असरकरचलीहैमिरीआह'पैकर'
उन्हेंआजनज़दीक-तरदेखतेहैं
  - Paikar Jafari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy