haqeeqat ko ajab andaaz se jhuthlaaya jaata hai | हक़ीक़त को अजब अंदाज़ से झुठलाया जाता है

  - Om Prakash Laghar
हक़ीक़तकोअजबअंदाज़सेझुठलायाजाताहै
ज़मानेकोख़ुदाकेनामपरबहकायाजाताहै
तअ'ल्लुक़रहनुमाकामुफ़लिस-ओ-नादारसेकैसा
उन्हेंवोटोंकीख़ातिरवक़्तपरफुस्लायाजाताहै
कहींमेरीशराफ़तकोकमज़ोरीसमझबैठे
कभीदुश्मनकोभीइसवास्तेधमकायाजाताहै
अगरचेहरनएदिनकानयाअंदाज़हैलेकिन
कभीअफ़्साना-ए-पारीनाभीदोहरायाजाताहै
अगरजज़्बातज़ख़्मीहोंतोहोगाफ़िक्रभीज़ख़्मी
यहीतारीख़केऔराक़मेंभीपायाजाताहै
येरुत्बाहरकिसीकोकू-ए-जानाँमेंनहींमिलता
कोईमंसूरहोतोदारपरलटकायाजाताहै
  - Om Prakash Laghar
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