shooor tak abhii un ki kahaan rasai hai | शुऊर तक अभी उन की कहाँ रसाई है

  - Obaidur Rahman
शुऊरतकअभीउनकीकहाँरसाईहै
अभीतोकितनेख़ुदाओंकीवाँख़ुदाईहै
गुमान-ए-तीरगीरख़शंदगीपेहोनेलगा
दयार-ए-शबनेअजबदास्ताँसुनाईहै
अबइसपेदूरनिकलआएतोख़फ़ाक्यूँँहो
येराहभीतोतुम्हीनेहमेंदिखाईहै
कभीजोमुझसेमिलेवोरहेख़मोशमगर
पस-ए-सुकूत-ए-ज़बाँख़ूबहम-नवाईहै
हरएकफ़िक्रकीतहमेंहोजज़्बा-ए-ख़ालिस
बहुतहीसख़्ततक़ाज़ा-ए-पारसाईहै
बहुतहीख़ूबकिदरियाकेपासरहतेहो
कहोकिप्यासभीअपनीकभीबुझाईहै
जोख़ुदहीजादा-ओ-मंज़िलसेना-बलदहै'उबैद'
अजीबबातयहाँउसकीरहनुमाईहै
  - Obaidur Rahman
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