gumrahi ka mirii samaan hua jaata hai | गुमरही का मिरी सामान हुआ जाता है

  - Obaidur Rahman
गुमरहीकामिरीसामानहुआजाताहै
रास्ताज़ीस्तकाआसानहुआजाताहै
इकतरफ़रूहकिपर्वाज़कोजैसेतय्यार
इकतरफ़जिस्मकिबे-जानहुआजाताहै
दश्त-ए-ग़ुर्बतहैकिआबादहमारेदमसे
घरकाआँगनहैकिवीरानहुआजाताहै
क्यूँँफिरधूपभीबनजाएघटाजबहमपर
आपकासाया-ए-मिज़्गानहुआजाताहै
कहदियाआपनेक्याकानमेंचुपकेसेइसे
दिलमेंबरपामिरेहैजानहुआजाताहै
आपकीमेरीहीग़ज़लोंकीहैंकतरनसारी
जिनसेवोसाहब-ए-दीवानहुआजाताहै
दीहैचुपकेसे'उबैद'उसनेलबोंपरदस्तक
शोरबरपातह-ए-शिरयानहुआजाताहै
  - Obaidur Rahman
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