manzilen aur bhi hain wahm-o-gumaan se aage | मंज़िलें और भी हैं वहम-ओ-गुमाँ से आगे

  - Obaidur Rahman
मंज़िलेंऔरभीहैंवहम-ओ-गुमाँसेआगे
हमकोकरनाहैसफ़रक़ैद-ए-मकाँसेआगे
पैकर-ए-शेरकोमल्बूसअताक्याकीजे
जबतख़य्युलकीहोपर्वाज़बयाँसेआगे
आबऔरख़ाककीयेबज़्महमेंक्यारासआती
हमकोजानाथासितारोंकेजहाँसेआगे
कबतलकदैर-ओ-हरमकीयेहदीस-ए-बे-सूद
मसअलेऔरहैंनाक़ूस-ओ-अज़ाँसेआगे
जुस्तुजूऔरहैकुछअहल-ए-जुनूँकीवर्ना
कौनकरताहैसफ़रजा-ए-अमाँसेआगे
कर्बकोअपनेतमाशाबनायाजाए
हैअदब-गाह-ए-वफ़ाआह-ओ-फ़ुग़ाँसेआगे
नज़्र-ए-अंदेशाहोजाएकहींज़ीस्त'उबैद'
बातकुछऔरकरेंसूद-ओ-ज़ियाँसेआगे
  - Obaidur Rahman
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