rah-e-safar men rahe aur hayaat se guzre | रह-ए-सफ़र में रहे और हयात से गुज़रे

  - Obaidur Rahman
रह-ए-सफ़रमेंरहेऔरहयातसेगुज़रे
किएकरंगमेंकितनेजिहातसेगुज़रे
बड़ेसुकूनसेहमएहतियातसेगुज़रे
क़दमजमाकेचलेकाएनातसेगुज़रे
हैकोईअज़्म-ए-जवाँऔरकुछजुनूँ-ख़ेज़ी
बे-दस्त-ओ-पाहीरहेमुम्किनातसेगुज़रे
यक़ीनदिलमेंरहातेरीदिलरुबाईका
सोजागजागकेहमसारीरातसेगुज़रे
कोईनतीजाकहाँबातकानिकलपाया
किएकबातहीक्याबातबातसेगुज़रे
तग़य्युरातकीदुनियामेंहमरहेहरदम
किसोतेजागतेहमभीहयातसेगुज़रे
कभीख़ुदकोकियावक़्फ़-ए-इंहिमाक-ए-वजूद
'उबैद'बचकेरहेहादसातसेगुज़रे
  - Obaidur Rahman
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