pur-kaif kahii ke bhi nazaare na rahenge | पुर-कैफ़ कहीं के भी नज़ारे न रहेंगे

  - Obaidur Rahman
पुर-कैफ़कहींकेभीनज़ारेरहेंगे
दुनियामेंअगरइश्क़केमारेरहेंगे
दुनिया-ए-मोहब्बतमेंचराग़ाँमिलेगा
पलकोंपेअगरअश्कहमारेरहेंगे
तुमछोड़केमतजाओमुझेशहर-ए-बलामें
वर्नामिरेजीनेकेसहारेरहेंगे
तयकरलोसफ़रशबकाकिमौक़ाहैग़नीमत
फिरचर्ख़-ए-बरींपेयेसितारेरहेंगे
ग़मज़ीस्तकेअफ़्सानेकाउनवानहसींहै
हमहोंगेकहाँग़मजोहमारेरहेंगे
बे-म'अनीनज़रआएँगेआँखोंकेसहीफ़े
मौजूदअगरउनमेंइशारेरहेंगे
फिरकिसपेयक़ींकैसाभरमकैसीमुरव्वत
आज़ाभीहमारेजोहमारेरहेंगे
  - Obaidur Rahman
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