hamaari zeest ka ik ek baab khul jaa.e | हमारी ज़ीस्त का इक एक बाब खुल जाए

  - Obaidur Rahman
हमारीज़ीस्तकाइकएकबाबखुलजाए
ख़ुदायाहमपेहमारीकिताबखुलजाए
फिरइसकेबा'दयेदश्त-ओ-दमनभलाक्याहैं
जोग़ौरो-ओ-फ़िक्रकरेंआफ़्ताबखुलजाए
ज़मींपेरास्ताआएनज़रतोक्याहैअजब
येरास्तातोमियाँज़ेर-ए-आबखुलजाए
ख़तीबचीख़ताहैरोज़हीसर-ए-मिंबर
मजालक्याहैजोहमपरख़िताबखुलजाए
जानेकबसेदर-ए-ख़्वाबपरहैक़ुफ़्लपड़ा
ख़ुदायाअबतोकोईहमपेबाबखुलजाए
हमारेफ़र्ज़कादफ़्तरतोखोलडालाहै
वरक़हुक़ूक़काभीइकजनाबखुलजाए
'उबैद'देनाहैहमसबकोइम्तिहाँइकदिन
दुआएँकीजेकिहमपरनिसाबखुलजाए
  - Obaidur Rahman
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