hai aaj andhera har jaanib aur noor ki baatein karte hain | है आज अँधेरा हर जानिब और नूर की बातें करते हैं

  - Obaidur Rahman
हैआजअँधेराहरजानिबऔरनूरकीबातेंकरतेहैं
नज़दीककीबातोंसेख़ाइफ़हमदूरकीबातेंकरतेहैं
तामीर-ओ-तरक़्क़ीवालेहैंकहिएभीतोउनकोक्याकहिए
जोशीश-महलमेंबैठेहुएमज़दूरकीबातेंकरतेहैं
येलोगवहीहैंजोकलतकतंज़ीम-ए-चमनकेदुश्मनथे
अबआजहमारेमुँहपरयेदस्तूरकीबातेंकरतेहैं
इकभाईकोदूजेभाईसेलड़नेकाजोदेतेहैंपैग़ाम
वोलोगजानेफिरकैसेजम्हूरकीबातेंकरतेहैं
इकख़्वाबकीवादीहैजिसमेंरहतेहैंहमेशाखोएहुए
धरतीपेनहींहैंजिनकेक़दमवोतूरकीबातेंकरतेहैं
हमकोयेगिलामहबूबउन्हेंअफ़्साना-ए-बज़्म-ए-ऐश-ओ-तरब
शिकवायेउन्हेंहमउनसेदिल-ए-रंजूरकीबातेंकरतेहैं
क्याख़ूबअदाहैउनकी'उबैद'अंदाज़-ए-करमहैकितनाहसीं
मजबूरकेहक़सेना-वाक़िफ़मजबूरकीबातेंकरतेहैं
  - Obaidur Rahman
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