nikhrana aql-o-khird ka agar zaroori hai | निखरना अक़्ल-ओ-ख़िरद का अगर ज़रूरी है

  - Obaidur Rahman
निखरनाअक़्ल-ओ-ख़िरदकाअगरज़रूरीहै
जुनूँकीराहबरीमेंसफ़रज़रूरीहै
हक़ीक़तोंसेजोहोताहैआश्नादोस्त
तोइसकेवास्तेराह-ए-ख़तरज़रूरीहै
किसीकीनीचीनज़रकासलामसाथरहे
सफ़रकेवास्तेज़ाद-ए-सफ़रज़रूरीहै
मगरयेशर्तहैहरलफ़्ज़रूहसेनिकले
दुअा-ए-नीम-शबीमेंअसरज़रूरीहै
दिलोंकाहालचेहरोंसेहोसकेज़ाहिर
ख़िरदकेदौरमेंयेभीहुनरज़रूरीहै
'उबैद'दूसरोंकोकरचुकेबहुततल्क़ीन
अबअपनेआपपेभीइकनज़रज़रूरीहै
  - Obaidur Rahman
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