kahaanii kuchh bhi nahin thii bayaañ ziyaada tha | कहानी कुछ भी नहीं थी बयाँ ज़ियादा था

  - Obaidur Rahman
कहानीकुछभीनहींथीबयाँज़ियादाथा
ज़रासीआगलगीथीधुआँज़ियादाथा
वोकारवाँमेंथाऐसीकोईबातनहीं
बिछड़गयाथाकिवोबद-गुमाँज़ियादाथा
बसइससबबसेराससकीहमेंयेज़मीं
किअपनेज़ेहनमेंयेआसमाँज़ियादाथा
मैंउसकेसाथसफ़रकरसकादूरतलक
किलफ़्ज़लफ़्ज़वोमुझपरअयाँज़ियादाथा
तोइसमेंक्याहैतअ'ज्जुबहुएजोआपतबाह
'उबैद'आपपेवोमेहरबाँज़ियादाथा
  - Obaidur Rahman
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