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Muzdum Khan
chale jaao magar itni madad karte hue jaao
chale jaao magar itni madad karte hue jaao | चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
- Muzdum Khan
चले
जाओ
मगर
इतनी
मदद
करते
हुए
जाओ
मैं
तन्हा
मर
न
जाऊँ
दो
अदद
करते
हुए
जाओ
चराग़ों
की
जलन
से
ख़त्म
हो
जाती
है
तारीक़ी
हसद
करते
हुए
आओ
हसद
करते
हुए
जाओ
- Muzdum Khan
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गर्मी
लगी
तो
ख़ुद
से
अलग
हो
के
सो
गए
सर्दी
लगी
तो
ख़ुद
को
दोबारा
पहन
लिया
Bedil Haidri
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आग
उगलती
रातों
में
इक
शीतलता
सी
छायी
थी
गर्मी
की
छुट्टी
में
फिर
वो
मामा
के
घर
आई
थी
Shubham Seth
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गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
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आग
का
क्या
है
पल
दो
पल
में
लगती
है
बुझते
बुझते
एक
ज़माना
लगता
है
Kaif Bhopali
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ये
मज़ा
था
दिल-लगी
का
कि
बराबर
आग
लगती
न
तुझे
क़रार
होता
न
मुझे
क़रार
होता
Dagh Dehlvi
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देख
तो
दिल
कि
जाँ
से
उठता
है
ये
धुआँ
सा
कहाँ
से
उठता
है
गोर
किस
दिलजले
की
है
ये
फ़लक
शोला
इक
सुब्ह
यां
से
उठता
है
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Meer Taqi Meer
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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तारीकियों
को
आग
लगे
और
दिया
जले
ये
रात
बैन
करती
रहे
और
दिया
जले
उस
की
ज़बाँ
में
इतना
असर
है
कि
निस्फ़
शब
वो
रौशनी
की
बात
करे
और
दिया
जले
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Tehzeeb Hafi
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इक
बर्फ़
सी
जमी
रहे
दीवार-ओ-बाम
पर
इक
आग
मेरे
कमरे
के
अंदर
लगी
रहे
Salim Saleem
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कभी
इश्क़
करो
और
फिर
देखो
इस
आग
में
जलते
रहने
से
कभी
दिल
पर
आँच
नहीं
आती
कभी
रंग
ख़राब
नहीं
होता
Saleem Kausar
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क्या
हुआ
जो
मुझे
हम-उम्र
मोहब्बत
न
मिली
मेरी
ख़्वाहिश
भी
यही
थी
कि
बड़ी
आग
लगे
Muzdum Khan
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बस
एक
मैं
था
जिस
सेे
सच
मुच
में
दिलबरी
की
वरना
हर
आदमी
से
उसने
दो
नंबरी
की
जिस
बात
में
भी
हमने
ख़ुद
को
अकेला
रक्खा
बाग़ात
में
भी
हमने
जोड़ों
की
मुख़बरी
की
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Muzdum Khan
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न
कोई
बीन
बजाई
न
टोकरी
खोली
बस
एक
फोन
मिलाने
पे
साँप
बैठा
है
कोई
भी
लड़की
अकेली
नज़र
नहीं
आती
यहाँ
हर
एक
ख़जाने
पे
साँप
बैठा
है
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Muzdum Khan
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हम
दो
बंदे
हैं
और
सिगरेट
एक
अब
ख़बर
होगी
दोस्ती
की
दोस्त
Muzdum Khan
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मैं
परेशान
वो
दुखी
हुई
है
ये
मोहब्बत
है
तो
बड़ी
हुई
है
कुछ
भी
अपना
नहीं
है
मेरे
पास
बद्दुआ
भी
किसी
की
दी
हुई
है
उस
ने
पूछी
है
आख़िरी
ख़्वाहिश
और
मोहब्बत
भी
मैं
ने
की
हुई
है
आज
ग़ुस्सा
नहीं
पिऊॅंगा
मैं
आज
मैं
ने
शराब
पी
हुई
है
मैं
तुम्हें
इतनी
बार
चाहता
हूॅं
जितनी
औरत
पे
शा'इरी
हुई
है
बच्चा
गिरवा
के
क्या
मिलेगा
तुम्हें
दुनिया
पहले
बहुत
गिरी
हुई
है
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Muzdum Khan
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