karishma-saaz-o-saraapa-bahaar hai ki nahin | करिश्मा-साज़-ओ-सरापा-बहार है कि नहीं

  - Naim Hamid Ali
करिश्मा-साज़-ओ-सरापा-बहारहैकिनहीं
शबाब-ओ-हुस्न-ए-ग़ज़लबा-वक़ारहैकिनहीं
ख़िज़ाँकादौरसहीयेबताओअहल-ए-चमन
यक़ीन-ए-आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहारहैकिनहीं
बजाकिमै-कदावीराँहैमस्जिदेंआबाद
रईस-ए-शहरभीपरहेज़-गारहैकिनहीं
ज़बाँख़तीबकीमज़मूँरईस-ए-शहरकाहै
नमाज़ियोंपेयेराज़आश्कारहैकिनहीं
निगाहचाहिएतहलील-ओ-तज्ज़ियेकेलिए
ख़िज़ाँकादौरनवेद-ए-बहारहैकिनहीं
हमारामाज़ी-ओ-हाज़िरभीइकमुअ'म्माहै
बहारथीकिनहींथीबहारहैकिनहीं
ग़ज़लतोकहतेहैंसबहममगरयेदेखतेहैं
वोकर्ब-ए-अस्रकीआईना-दारहैकिनहीं
हिजाबमान-ए-जल्वासहीनवेदभीहै
ख़िज़ाँनक़ाब-ए-निगार-ए-बहारहैकिनहीं
मदारबख़्शिश-ओ-पुर्सिशकाहैनियतपे'नईम'
उमीद-ए-रहमत-ए-परवरदिगारहैकिनहीं
  - Naim Hamid Ali
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