kabhi sarsar hai kabhi baad-e-saba hai saaqi | कभी सरसर है कभी बाद-ए-सबा है साक़ी

  - Naim Hamid Ali
कभीसरसरहैकभीबाद-ए-सबाहैसाक़ी
ज़िंदगीसिलसिला-ए-बीम-ओ-रजाहैसाक़ी
कुदूरतहैकिसीसेगिलाहैसाक़ी
मैंनेख़ुदअपनेमुक़द्दरकोलिखाहैसाक़ी
अपनेमाहौलमेंशामिलहूँमैंऔरोंकीतरह
मेरेजीनेकामगरतौरजुदाहैसाक़ी
मेराचेहरामिरेजज़्बातकाअक्कासनहीं
मेरादिलदेखजहाँहश्रबपाहैसाक़ी
कुछकहेंअहल-ए-ख़िरदफ़िक्रनहींहैमुझको
मेरेआ'मालख़ुदादेखरहाहैसाक़ी
मुफ़्ती-ओ-मोहतसिब-ओ-वाइज़-ओ-क़ाज़ी-ओ-फ़क़ीह
तेरीआँखोंसेकहींकोईबचाहैसाक़ी
वाक़िफ़-ए-राज़हैमय-ख़ाना-ए-हस्तीका'नईम'
उसकेहोंटोंपेमगरक़ुफ़्ल-ए-वफ़ाहैसाक़ी
  - Naim Hamid Ali
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