na the ranj-o-alam aah-o-fughaan kal shab jahaan main tha | न थे रंज-ओ-अलम आह-ओ-फ़ुग़ाँ कल शब जहाँ मैं था

  - Naim Hamid Ali
थेरंज-ओ-अलमआह-ओ-फ़ुग़ाँकलशबजहाँमैंथा
बहारेंथींथाख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँकलशबजहाँमेंथा
जहान-ए-साबित-ओ-सय्यारथागर्द-ए-सफ़रमेरी
मिरेज़ेर-ए-क़दमथीकहकशाँकलशबजहाँमैंथा
परी-पैकरनिगारेसर्व-क़द्देलाला-रुख़्सारे
हसींइकइकसेबढ़करथेवहाँकलशबजहाँमैंथा
मोअद्दबसफ़-ब-सफ़कर्रूबियाँताज़ीमदेतेथे
सरीर-आराथेशाह-ए-दो-जहाँकलशबजहाँमैंथा
अता-ए-अहल-ए-दिलहैइसकोअहल-ए-दिलसमझतेथे
मैंपहूँचाकिसतरहकैसेवहाँकलशबजहाँमैंथा
  - Naim Hamid Ali
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