tilism-e-shams-o-nujoom-o-qamar se guzre hain | तिलिस्म-ए-शम्स-ओ-नुजूम-ओ-क़मर से गुज़रे हैं

  - Naim Hamid Ali
तिलिस्म-ए-शम्स-ओ-नुजूम-ओ-क़मरसेगुज़रेहैं
दयार-ए-हुस्नकीहररहगुज़रसेगुज़रेहैं
कोईभीक़ल्ब-ओ-नज़रकोअसीरकरसका
हज़ाररंगकेजल्वेनज़रसेगुज़रेहैं
हरइम्तिहान-ए-अज़ीमतसेतेरेदीवाने
बहुतवक़ारबड़ेकर्र-ओ-फ़रसेगुज़रेहैं
ठहरगईहैंवहींगर्दिशेंज़मानेकी
बला-कशान-ए-मोहब्बतजिधरसेगुज़रेहैं
'नईम'जिनसेइबारतहैज़िंदगीकासुकूँ
वोहादसातभीमेरीनज़रसेगुज़रेहैं
  - Naim Hamid Ali
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