ik vo ki apni zid pe barabar arde rahe | इक वो कि अपनी ज़िद पे बराबर अड़े रहे

  - Naeem Faraz
इकवोकिअपनीज़िदपेबराबरअड़ेरहे
इकहमकिइंतिज़ारमेंपहरोंखड़ेरहे
दरिया-ए-इश्क़करलियाहोताउबूरमैं
लेकिनमिरेनसीबमेंकच्चेघड़ेरहे
जितनेथेकम-निगाहवोजलवोंमेंखोगए
अहल-ए-नज़रकीआँखपेपर्देपड़ेरहे
इकशोरजीहुज़ूरीकारहताथाआस-पास
जबतकमिरेलिबासमेंहीरेजड़ेरहे
हैरतकिजिनकोढूँडेहैदरियाइधरउधर
दरपरमिरे'फ़राज़'वोप्यासेखड़ेरहे
  - Naeem Faraz
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