lakeeren kheench kar kya kya vo kaaghaz par banata hai | लकीरें खींच कर क्या क्या वो काग़ज़ पर बनाता है

  - Naeem Faraz
लकीरेंखींचकरक्याक्यावोकाग़ज़परबनाताहै
तिरादिवानातेरेहुस्नकापैकरबनाताहै
बदलतेवक़्तनेउसकाहसींपेशाबदलडाला
जोकलफूलोंकाताजिरथावोअबख़ंजरबनाताहै
बिनागहनोंकेरुख़्सतहोगईलख़्त-ए-जिगरउसकी
अमीरोंकेलिएजोक़ीमतीज़ेवरबनाताहै
चलोउसशख़्सकीहिम्मतकीहमभीदादहीदेलें
समुंदरकेकिनारेरेतकाजोघरबनाताहै
जुनूँकीकौनसीमंज़िलपेपहुँचाहैदीवाना
जोसूरजकेमुक़ाबिलमोमकालश्करबनाताहै
'फ़राज़'उसकेक़दमलेनेकभीमंज़िलनहींआती
सफ़रकेसिर्फ़मंसूबेहीजोअक्सरबनाताहै
  - Naeem Faraz
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