zinda rahne ki talab is li.e pyaari na rahi | ज़िंदा रहने की तलब इस लिए प्यारी न रही

  - Nadeem Sirsivi
ज़िंदारहनेकीतलबइसलिएप्यारीरही
कोईवक़अतदिल-ए-क़ातिलमेंहमारीरही
मय-कशीछोड़दीइसवास्तेहमनेसाक़ी
पहलेजैसीतिरीआँखोंमेंख़ुमारीरही
नींदकाज़हरनिगाहोंमेंसमायाजबसे
रतजगोंसेमिरीबा-ज़ाब्तायारीरही
आख़िरशहीगयाकुश्ता-ए-हसरतकोक़रार
उम्र-भरलज़्ज़त-ए-आवारगीतारीरही
सीखताकिसतरहआईन-ए-जुनूँकेआदाब
मुझपेमाइलब-करमदीदतुम्हारीरही
शिद्दत-ए-ज़ब्तसेपथरागईंआँखेंभी'नदीम'
ग़मरहासाथमेंपरगिर्या-ओ-ज़ारीरही
  - Nadeem Sirsivi
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