चाहतायेहूँकिबेनाम-ओ-निशाँहोजाऊँ
शामकीतरहजलूँऔरधुआँहोजाऊँ
पहलेदहलीज़पेरौशनकरूँँआँखोंकेचराग़
औरफिरख़ुदकिसीपर्देमेंनिहाँहोजाऊँ
तोड़करफेंकदूँयेफ़िरक़ा-परस्तीकेमहल
औरपेशानीपेसज्देकानिशाँहोजाऊँ
दिलसेफिरदर्दमहकनेकीसदाएँउट्ठें
काशऐसाहोमैंतेरीरग-ए-जाँहोजाऊँ
बसतिरेज़िक्रमेंकटजाएँमिरेरोज़-ओ-शब
नूरकीशाख़पेचिड़ियोंकीज़बाँहोजाऊँ
ख़ाकजिसकूचेकीमलतेहैंफ़रिश्तेआकर
मैंउसीख़ाककेज़र्रोंमेंनिहाँहोजाऊँ
मेरीआवारा-मिज़ाजीकोसुकूँमिलजाए
दर्दबनकरतिरेसीनेमेंरवाँहोजाऊँ