chahta ye hooñ ki benaam-o-nishaan ho jaaun | चाहता ये हूँ कि बेनाम-ओ-निशाँ हो जाऊँ

  - Azm Shakri
चाहतायेहूँकिबेनाम-ओ-निशाँहोजाऊँ
शामकीतरहजलूँऔरधुआँहोजाऊँ
पहलेदहलीज़पेरौशनकरूँँआँखोंकेचराग़
औरफिरख़ुदकिसीपर्देमेंनिहाँहोजाऊँ
तोड़करफेंकदूँयेफ़िरक़ा-परस्तीकेमहल
औरपेशानीपेसज्देकानिशाँहोजाऊँ
दिलसेफिरदर्दमहकनेकीसदाएँउट्ठें
काशऐसाहोमैंतेरीरग-ए-जाँहोजाऊँ
बसतिरेज़िक्रमेंकटजाएँमिरेरोज़-ओ-शब
नूरकीशाख़पेचिड़ियोंकीज़बाँहोजाऊँ
ख़ाकजिसकूचेकीमलतेहैंफ़रिश्तेकर
मैंउसीख़ाककेज़र्रोंमेंनिहाँहोजाऊँ
मेरीआवारा-मिज़ाजीकोसुकूँमिलजाए
दर्दबनकरतिरेसीनेमेंरवाँहोजाऊँ
  - Azm Shakri
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