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Afzal Ali Afzal
kahaan kahaan pe use dhoondhte hain ham yaaron
kahaan kahaan pe use dhoondhte hain ham yaaron | कहाँ कहाँ पे उसे ढूंढते हैं हम यारों
- Afzal Ali Afzal
कहाँ
कहाँ
पे
उसे
ढूंढते
हैं
हम
यारों
किसी
के
लम्स
से
होता
था
जो
सुकूँ
दिल
को
- Afzal Ali Afzal
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मुसीबतों
में
तो
याद
करते
ही
हैं
किसी
को
ये
लोग
सारे
मगर
कभी
जो
सुकूँ
में
आए
ख़याल
मेरा
तो
लौट
आना
Hasan Raqim
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तुम
न
आए
तो
क्या
सहर
न
हुई
हाँ
मगर
चैन
से
बसर
न
हुई
मेरा
नाला
सुना
ज़माने
ने
एक
तुम
हो
जिसे
ख़बर
न
हुई
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Mirza Ghalib
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एक
ही
शख़्स
नहीं
होता
सदा
दिल
का
सुकूँ
एक
करवट
पे
कभी
नींद
नहीं
आ
सकती
Rehan Mirza
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बे
तेरे
क्या
वहशत
हम
को
तुझ
बिन
कैसा
सब्र-ओ-सुकूँ
तू
ही
अपना
शहर
है
जानी
तू
ही
अपना
सहरा
है
Ibn E Insha
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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इतना
तो
ज़िन्दगी
में
किसी
के
ख़लल
पड़े
हँसने
से
हो
सुकून
न
रोने
से
कल
पड़े
जिस
तरह
हँस
रहा
हूँ
मैं
पी
पी
के
गर्म
अश्क
यूँँ
दूसरा
हँसे
तो
कलेजा
निकल
पड़े
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Kaifi Azmi
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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जो
चराग़
सारे
बुझा
चुके
उन्हें
इंतिज़ार
कहाँ
रहा
ये
सुकूँ
का
दौर-ए-शदीद
है
कोई
बे-क़रार
कहाँ
रहा
Ada Jafarey
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साथ
था
इतना
बस
और
बस
एक
या
दो
बरस
और
बस
चाहतें
हैं
ये
क्या
आज-कल
काल्स
कीं
आठ
दस
और
बस
तो
मनाना
है
उस
को
तुझे
प्यार
की
थाम
नस
और
बस
इस्मतें
लुट
रही
हैं
ये
क्यूँ
इक
ज़रा
सी
हवस
और
बस
था
मिला
वो
मुझे
इस
तरह
चरसी
को
जूँ
चरस
और
बस
डर
किसी
को
नहीं
होगा
क्या
चंद
रोज़ा
क़फ़स
और
बस
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Afzal Ali Afzal
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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चूमा
था
एक
दिन
किसी
गुल
की
जबीन
को
लहजे
से
आज
तक
मेरे
ख़ुश्बू
नहीं
गई
Afzal Ali Afzal
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पास
मेरे
भी
क्या
नहीं
होता
दूर
अगर
तू
हुआ
नहीं
होता
तू
जो
मुझ
सेे
मिला
नहीं
होता
इश्क़
क्या
है
पता
नहीं
होता
हम
जो
इंसां
कभी
अगर
होते
ज़ात
का
मसअला
नहीं
होता
दर्द
हद
से
गुज़र
गया
मौला
फिर
भला
क्यूँँ
दवा
नहीं
होता
चाहे
उड़
ले
तू
आसमानों
में
ऐसे
कोई
ख़ुदा
नहीं
होता
हम
अगर
दोस्ती
पे
रुक
जाते
दरमियाँ
फ़ासला
नहीं
होता
है
अजब
मसअला
कि
वो
अफ़ज़ल
मेरा
होकर
मिरा
नहीं
होता
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Afzal Ali Afzal
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सीने
में
मेरे
दिल
है,
पर
अब
उस
में
तू
नहीं
यानी
तिजोरी
तो
है
मगर
धन
नहीं
बचा
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Afzal Ali Afzal
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